हम सब चाहते हैं कि घर में आपसी समझ और प्यार बना रहे। अक्सर छोटे‑छोटे काम बड़ी खुशी दे देते हैं। अगर आप अपने परिवार में गर्मजोशी लाना चाहते हैं तो नीचे दिए गए आसान तरीकों को आज़माएं।
सुबह जल्दी उठकर सभी को एक छोटी सी ‘गुड मॉर्निंग’ कहें। इससे दिन की शुरुआत सकारात्मक होती है। खाने के समय मोबाइल से दूर रहकर मिलकर खाने की आदत बनाएं। साथ में टेबल पर बात‑चीत करने से बच्चों को सुनने‑समझने की कला भी आती है।
रात को सोने से पहले पाँच मिनट का “फैमिली टाइम” रखें। टीवी बंद करके एक‑दूसरे को आज का सबसे अच्छा या मजेदार पल बताने को कहें। इस छोटे से रूटीन से दिन भर की थकान भी दूर हो जाती है और आपसी जुड़े रहने का एहसास बढ़ता है।
हर सदस्य का अपना शेड्यूल होता है, पर एक साथ बिताया हुआ समय रिश्तों को गहरा बनाता है। सप्ताह में एक बार ‘फ़ैमिली आउटिंग’ प्लान करें – चाहे पार्क में सैर हो या घर में खेल‑खेल। इस तरह की एक्टिविटीज़ में हँसी-मज़ाक स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ता है।
बच्चों के साथ बात करते समय उनके सवालों को गंभीरता से सुनें, चाहे वह स्कूल की बात हो या दोस्ती की। उनका आत्म‑विश्वास बढ़ता है और वे बड़े होकर भी अपने भावनाओं को व्यक्त करने में सहज होते हैं। बुजुर्गों को भी नियमित रूप से कॉल या मिलना न भूलें; उनका अनुभव सुनकर आप सीखते हैं और उनका दिल खुश रहता है।
कभी‑कभी कोई छोटा विवाद भी हो सकता है। ऐसे में तुरंत जीत‑हार की सोच ना रखें, बल्कि ‘मैं’ से शुरू होने वाले वाक्य बनाकर अपनी बात रखें – जैसे “मैं ऐसा महसूस करता/करती हूँ जब…”. यह तरीका थन‑थन की बातों को कम कर देता है और समाधान की राह खोलता है।
घर के कामों को सब मिलकर बांटें। बच्चा बर्तन धो सकता है, पति/पत्नी कपड़े धो सकते हैं, माँ खाने की तैयारी कर सकती है। जब हर कोई अपना हिस्सा निभाता है तो जिम्मेदारी की भावना बढ़ती है और तनाव कम होता है।
आखिर में, याद रखें कि परिवार में ‘गलती’ भी मानवीय है। माफ़ी माँगना और देना रिश्तों को और मजबूत बनाता है। एक‑दूसरे को सराहना, छोटा‑सा धन्यवाद या सरप्राइज़ गिफ्ट देना भी बहुत असरदार है। ये छोटे‑छोटे इशारे आपके घर की खुशियों को दो गुना कर देंगे।
इन आसान टिप्स को अपनाकर आप देखेंगे कि आपका घर पहले से ज्यादा चुलबुला और सुकून भरा बन गया है। परिवार, हमारे जीवन का सबसे बड़ा सहारा है – इसे प्यार और समझ के साथ रखें।
तमिल अभिनेता विजय ने तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ी चर्चा का विषय बनाया जब उन्होंने तमिल विजयकायम पार्टी के पहले सम्मेलन में 'परियर' को मार्गदर्शक के रूप में चुना। उन्होंने देवता अस्वीकृति, परिवारवाद, और विभाजनकारी राजनीति पर अपने विचार साझा किए। विजय का मानना है कि राज्य की राजनीति आज भी परियार के वैचारिक मूल्यों के इर्द-गिर्द घूम रही है।