हिजबुल्लाह नाम अक्सर समाचार में सुनते हैं, पर वास्तव में इसका मतलब क्या है? यह शब्द मुख्य रूप से मध्य एशिया के एक मिलिशिया समूह को दर्शाता है, जो अफगानिस्तान और पाकिस्तान के कुछ क्षेत्रों में सक्रिय रहा है। आम लोग इसे आतंकवादी या सशस्त्र ताकत के रूप में देखते हैं, लेकिन इसके पीछे के कारण, इतिहास और राजनीतिक पृष्ठभूमि को समझना जरूरी है।
पिछले कुछ महीनों में हिजबुल्लाह से जुड़ी कई खबरें सामने आई हैं। सबसे बड़ी बात तो यह रही कि उन्होंने कुछ सीमा पार हमलों को अंजाम दिया, जिससे दोनों देशों के सुरक्षा बलों में तनाव बढ़ गया। इसके अलावा, कई बार इस समूह ने स्थानीय जनता के साथ मिलकर विकास कार्य भी किए, जिससे उनका समर्थन कुछ क्षेत्रों में बना रहा। इन खबरों को देखते हुए सरकारें और मीडिया दोनों ही इस समूह की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठा रहे हैं।
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हिजबुल्लाह के बारे में अक्सर सवाल उठते हैं कि क्या यह सिर्फ एक सशस्त्र समूह है या इसका कोई राजनीतिक एजेंडा भी है। वास्तव में, इस समूह का गठन कई दशकों पहले स्थानीय सुरक्षा और सामाजिक कारणों से हुआ था, लेकिन समय के साथ उसकी भूमिका बदलती रही। इसलिए, पिछले घटनाक्रम को समझना और वर्तमान स्थिति को देखना दोनों जरूरी है।
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हमास नेता इस्माइल हनिया की ईरान में हत्या और लेबनान में हिजबुल्लाह कमांडर फुआद शुकर की हत्या ने मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा दिया है। यह हमले इज़राइल द्वारा किए गए माने जा रहे हैं, जिससे संभावित प्रतिशोध की चिंता बढ़ गई है। इससे जारी संघर्ष विराम वार्ताओं में बाधा आ सकती है और तेहरान की ओर से कठोर प्रतिक्रिया हो सकती है।