NMMS परिणाम 2025-26: राज्यों में जारी लिस्ट और कट-ऑफ

NMMS परिणाम 2025-26: राज्यों में जारी लिस्ट और कट-ऑफ

परिणाम की घोषणा हो गई है। अगर आपका बच्cla 8वीं में होकर इस परीक्षा में शामिल हुआ था, तो अब रिश्तेदारों और परिवार वालों के चेहरों पर मुस्कान लौट रही है। नेशनल मिंस कॉम मेरिट स्कॉलरशिप स्कीम यानी NMMS के 2025-26 के परिणाम जनवरी से जून 2026 के बीच कई राज्यों में गूंज रहे हैं। यह सिर्फ एक नोटिफिकेशन नहीं, बल्कि लाखों मासूम किड्स के भविष्य का सहारा है।

खुद शिक्षा मंत्रालय की ओर से दी जाने वाली यह योजना उन विद्यार्थियों के लिए बनाई गई है जो economically कमजोर हैं लेकिन हुनर वाले हैं। मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों ने अपने-अपने समय पर लिस्ट जारी कर दी है। सबसे बड़ी बात यह कि सीधी बैंक खाते में पैसा जाना शुरू होने वाला है।

परिणामों में खुशी और चुनौतियाँ

सच कहूँ तो परिणाम आना ही काफी है, लेकिन असली खेल शुरू होता है उस दिन जब वे अपनी पात्रता सत्यापित करते हैं। मध्य प्रदेश में 31 मार्च 2026 को टेस्ट खत्म हुआ था, और अब मार्च की अगले महीने ही रिजल्ट निकल आए। भोपाल में बसे राज्य शिक्षा केंद्र ने इसे हाइड्रोलॉजी नहीं, बल्कि सीधे ऑनलाइन पोर्टल के जरिए किया।

कुछ चीजें थोड़ी अजीब तरह से लगीं। कुछ स्टेट्स में कट-ऑफ बदला हुआ था। पुरानी संरचनाओं के मुकाबले इस बार ट्रांसपेरेंसी थोड़ा ज्यादा दिखाई दी। लेकिन फिर भी,很多家长 पूछते हैं—"मेरा बच्चा मेरिट लिस्ट में नहीं है, क्या अब मौका नहीं है?" जवाब साफ़ है कि अगर नाम नहीं है, तो पुनः प्रयास करना होगा, क्योंकि यह लिस्ट फाइनल होती है।

पात्रता और कट-ऑफ का तमाम हिसाब

आइए बात करें अंकों की, जो सबका दिल घबराता है। सामान्य श्रेणी के लिए 40% और आरक्षित (SC/ST) के लिए 32% का नियम लगातार बना रहा है। ये अंक दो पेपरों पर लगते हैं—मेंटल एबिलिटी (MAT) और स्कोलैस्टिक एबिलिटी (SAT)।

  • जनरल कैटेगरी के लिए: कुल 40% अंक दोनों पेपर में।
  • आरक्षित वर्ग के लिए: 32% अंक (5% रियायत के बाद)।
  • क्लास 7th में पास होने के लिए न्यूनतम 55% जरूरी था।

ये नंबर कोई गेम नहीं हैं। अगर किसी छात्र ने क्लास 9th या 11th में 55% से कम किया, तो शिष्यवृत्ति रुक सकती है। खास बात यह है कि क्लास 10th में 60% रखने का नियम बहुत सख्त है। राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के दिशा निर्देशों के मुताबिक, ये मानक हर राज्य के लिए समान हैं, चाहे वह महाराष्ट्र हो या उत्तर भारत।

राज्य-वार जानकारी और पोर्टल

हर राज्य ने अपना ढंग अपनाया है। पंजाब के बच्चों को राष्ट्रीय शिष्यवृत्ति पोर्टल पर जाकर अपना आधार कार्ड लिंक करना होगा। वहीं, राजस्थान ने 'इंटीग्रेटेड शाळा डार्पन' का इस्तेमाल किया।

NMMS परीक्षा 2025-26 राजस्थान में 86,087 छात्रों ने भाग लिया। आश्चर्य की बात है, 84.6% उपस्थिति थी। यानी जिस दिन परीक्षा हुई, वहाँ ज्यादातर बच्चे पहुंचे थे। यह एक अच्छा संकेत है कि शिक्षा की तरफ झुकाव बढ़ा है।

बिहार में SCERT का कठोर नियम लागू हुआ। वहां केवल सरकारी मदद स्कूल या मान्यता प्राप्त मंदिर स्कूलों के छात्र ही पात्र रहे। यदि किसी निजी स्कूल के बच्चे को नाम दिया गया था, तो उन्हें डोक्यूमेंट्स दिखाने होते हैं कि वो सरकार की शर्तें पूरी कर रहे हैं।

पैसे कैसे और कब मिलेंगे?

पैसे कैसे और कब मिलेंगे?

सवाल यह है कि पैसा कब आता है? जब तक आप क्लास 9th में एड्मिशन नहीं लेते, तब तक रजिस्ट्रेशन नहीं खुलता। नेशनल शिष्यवृत्ति पोर्टल (NSP) पर अकाउंट बनाना अनिवार्य है।

योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों को डिग्री तक पहुँचाने में मदद करना है। एक बार वेरिफिकेशन पूरी हो जाए, तो सालाना 12,000 रुपये सीधे खाते में ट्रांसफर होते हैं। कुल मिलाकर चार साल में यह राशि लगभग 48,000 रुपये बनती है।

मुझे याद दिलाते हैं, यह पैसा टाइमिंग पर निर्भर करता है। मार्च में परिणाम आए, लेकिन जून तक डीपीएस (Document Processing) पूरी होगी। इसलिए बैंक एक्सैक्ट डिटेल्स अपडेट करना ज़रूरी है।

अक्सर पूछे गए प्रश्न

NMMS परिणाम कहाँ देखें?

हर राज्य का अपना पोर्टल है। मध्य प्रदेश के लिए educationportal.mp.gov.in और राजस्थान के लिए इंटीग्रेटेड शाळा डार्पन। रोल नंबर और जन्म तिथि डालकर चेक करें।

क्या बिना आधार कार्ड के आवेदन हो सकता है?

नहीं, आधार कार्ड बाइंडिंग अनिवार्य है। पहले बैंक अकाउंट से लिंक करें और फिर NSP पोर्टल पर रजिस्टर करें।

कट-ऑफ अंक कितने थे?

जनरल कैटेगरी के लिए 40% और आरक्षित वर्ग के लिए 32%। यह MAT और SAT दोनों पेपरों पर लागू होता है।

शिष्यवृत्ति कितने साल तक मिलेगी?

इस योजना के तहत क्लास 9 से लेकर 12 तक यानी चार साल तक वार्षिक रूप से 12,000 रुपये मिलते हैं, बशर्ते अंक बने रहें।

रिजल्ट की अपील कैसे करें?

मोस्ट ऑफ द स्टेट्स में अब अपील करने की सुविधा समाप्त हो चुकी है। अगर नाम नहीं है, तो अगले वर्ष के लिए तैयारी करें।

14 Comments

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    sachin sharma

    मार्च 31, 2026 AT 18:54

    परिणाम आने के बाद जो राहत मिली है वह शब्दों में वर्णन नहीं की जा सकती। परिवार वालों के चेहरे पर मुस्किल वापस आ गई है।

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    Nikita Roy

    अप्रैल 1, 2026 AT 09:44

    मेरे मन को यकीन हुआ कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती और यह पुरस्कार बहुत बड़ी बात है बच्चों के लिए

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    vipul gangwar

    अप्रैल 1, 2026 AT 18:05

    देखकर अच्छा लगा कि इतनी भीड़ में भी लोग अपना नाम ढूंढ रहे हैं क्योंकि सबको अपने भविष्य से लेकर ही डर था।

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    Ashish Gupta

    अप्रैल 2, 2026 AT 17:55

    वाह यार! 🎉 इसे जरूर जानें कि डेटा कैसे उपलब्ध कराया गया है। शिक्षा में सुधार का यह तो बहुत बड़ा संकेत है। 👍

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    Arun Prasath

    अप्रैल 3, 2026 AT 14:37

    प्रक्रिया में पारदर्शिता का प्रमुख उद्देश्य छात्रों के अधिकारों को सुनिश्चित करना है। राज्य शासनों द्वारा समय पर पोर्टल खुलवाना एक सकारात्मक कदम माना जाता है।

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    Anil Kapoor

    अप्रैल 4, 2026 AT 23:35

    लोग अभी भी गलत समझ में रहते हैं कि सिर्फ रोल नंबर से सब कुछ तय हो जाएगा जबकि दस्तावेजों की वैधता ज्यादा मायने रखती है। बहुत से लोग बस नाम ढूंढते रहते हैं।

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    Pradeep Maurya

    अप्रैल 6, 2026 AT 00:46

    यह योजना सच में बहुत जरूरी है। कई गरीब बच्चे इस पर निर्भर हैं। सरकार का फोकस एजुकेशन की तरफ है। कट ऑफ को ध्यान से देखना चाहिए। हर राज्य का नियम थोड़ा अलग होता है। मध्य प्रदेश ने पहले रिजल्ट डाले थे। राजस्थान में भी प्रक्रिया तेजी से चल रही है। बिहार के बच्चों को भी लाभ मिल रहा है। आरक्षण की नीति भी लागू है। डॉक्यूमेंट्स खराब होने का डर न करें। आधार कार्ड लिंक करना ज़रूरी है। बैंक खाते की जानकारी अपडेट रखें। पैसा सीधे ट्रांसफर होता है। समय पर रजिस्ट्रेशन कर लें। भविष्य के लिए यह सहारा साबित होगा।

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    Priya Menon

    अप्रैल 6, 2026 AT 06:01

    विवरणों को इस प्रकार व्यवस्थित करने से पाठकों को स्पष्टता मिलती है। आपको शुभकामनाएं कि आपने तकनीकी पहलुओं को अच्छे से समझाया है।

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    megha iyer

    अप्रैल 7, 2026 AT 08:59

    यह सब अच्छा नहीं है।

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    Sharath Narla

    अप्रैल 9, 2026 AT 06:50

    अक्सर लोग सिर्फ नतीजे देखकर खुश होते हैं लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता कि इसके पीछे कितना सच है।

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    Rashi Jain

    अप्रैल 11, 2026 AT 00:24

    आंकड़ों का विश्लेषण करता हूं तो लगता है कि उपस्थिति दर में काफी वृद्धि हुई है। इससे यह पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी जागरूकता बढ़ रही है। कई बार छुपे हुए मुद्दे जैसे बैंक खाते की सटीकता पर भी ध्यान देना पड़ता है।

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    Anu Taneja

    अप्रैल 11, 2026 AT 04:39

    संभवतः यह विवरण उन लोगों के लिए उपयोगी होगा जिन्होंने अभी तक सूचना नहीं देखी है।

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    SAURABH PATHAK

    अप्रैल 11, 2026 AT 18:25

    मेरे ख्याल से ये चीजें बहुत महत्वपूर्ण हैं और अगर कोई गलती हो जाए तो दुर्घटना बन सकती है इसलिए सही जानकारी ही चाहिए।

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    Pranav nair

    अप्रैल 13, 2026 AT 12:06

    बहुत सही बात कही आपने दोस्त हमें सतर्क रहना चाहिए। 😊

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