बेरोज़गारी आज हर गाँव‑शहर में चर्चा का विषय बन गई है। कई लोग पूछते हैं – क्यों उद्यमियों की जगह नौकरी नहीं मिल रही? चलिए, आसान शब्दों में इस समस्या को समझते हैं और कुछ ठोस कदम देखते हैं जो आपकी नौकरी या आय के रास्ते खोल सकते हैं।
पहला कारण है स्किल ग्रेपन यानी शिक्षा और नौकरी की ज़रूरतों में अंतर। बहुत सारे कॉलेज ग्रेजुएट पदवी से निकलते हैं, पर फिर भी उनका कौशल आज के डिजिटल या तकनीकी काम से मेल नहीं खाता। दूसरा कारण है उद्योगों का धीमा विकास – खासकर छोटे‑मध्यम उद्यमों में निवेश कम हो रहा है, जिससे रोजगार के मौके घट रहे हैं। तीसरा, जनसंख्या बढ़ोतरी है; हर साल लाखों नए ग्रेजुएट्स आते हैं, जबकि नई जॉब की संख्या सीमित रहती है।
सरकार ने कई योजनाएँ शुरू की हैं – राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन (NSDM), प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना (PMEGP) और स्टार्ट‑अप इंडिया। इनका मकसद स्किल ट्रेनिंग, छोटे व्यापार को फाइनेंस और स्टार्ट‑अप को सपोर्ट देना है। साथ ही, डिजिटल स्किल लैब्स जैसे प्रोग्राम युवाओं को कोडिंग, डिजिटल मार्केटिंग और फ्रीलांसिंग सिखाते हैं, जिससे स्वरोजगार का रास्ता खुलता है।
निजी सेक्टर में कंपनियां अब इंटर्नशिप‑टू‑फुल‑टाइम मॉडल अपनाती हैं। इससे आप बिना बड़ी रकम खर्च किए, दो‑तीन महीने में काम सीख सकते हैं और तब तक कंपनी में जॉब पक्की हो जाती है। यदि आप अस्थायी काम कर रहे हैं, तो अपने कार्यकाल को प्रोफ़ाइल में जोड़ें; ये छोटे‑छोटे स्टेज आपके रिज्यूमे को ताकत देते हैं।
अब बात करते हैं उन व्यक्तिगत कदमों की जो आप फ़िलहाल कर सकते हैं:
एक और अहम टिप है स्थानीय रोजगार केंद्र का उपयोग। ये केंद्र अक्सर मुफ्त स्किल ट्रेनिंग, जॉब मैपिंग और साक्षात्कार तैयारी में मदद करते हैं। आपको सिर्फ़ एक बार ऑनलाइन रजिस्टर करके, समय‑समय पर अपडेटेड जॉब लिस्ट मिलती रहती है।
उम्मीद है अब आप समझ गए होंगे कि बेरोज़गारी सिर्फ़ सरकारी समस्या नहीं, बल्कि व्यक्तिगत प्रयासों की कमी से भी जुड़ी है। सही स्किल, सही नेटवर्क और छोटे‑छोटे कदमों से आप इस चुनौती को पार कर सकते हैं। याद रखें, नौकरी का सफर एक दौड़ नहीं, बल्कि लगातार चलने वाला मैराथन है – सही जर्सी (स्किल) और सही मार्ग (सही प्लेटफ़ॉर्म) आपके जीतने की गारंटी है।
महाराष्ट्र सरकार ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 'लाडला भाई योजना' की घोषणा की है। इस योजना का उद्देश्य 12वीं पास छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। 12वीं पास छात्रों को ₹6,000, डिप्लोमा धारकों को ₹8,000 और डिग्री होल्डर्स को ₹10,000 प्रति माह मिलेंगे। यह कदम विपक्ष द्वारा उठाए गए बेरोज़गारी के मुद्दे के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। योजना की घोषणा आषाढ़ी एकादशी के मौके पर 17 जुलाई को की गई थी।