अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। उन्होंने मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्धविराम (ceasefire) का श्रेय खुद लेने की कोशिश की है, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया है। मामला तब और बिगड़ गया जब ट्रंप ने भारत और चीन जैसे देशों के लिए 'हेलहोल' (नरक जैसा) जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। यह पूरी खींचतान उस समय सामने आई जब ट्रंप विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठकdavos में अपना संबोधन दे रहे थे।
हैरानी की बात यह है कि ट्रंप ने 10 मई 2025 से अब तक करीब 80 से ज्यादा बार यह दावा किया है कि उन्होंने ही दोनों पड़ोसी देशों को "पूर्ण और तत्काल" सैन्य युद्धविराम के लिए मनाया। लेकिन भारत का रुख एकदम साफ है- इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी।
ऑपरेशन सिंदूर और युद्धविराम की असल कहानी
इस पूरे विवाद की जड़ें अप्रैल 2025 में हैं। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में एक दर्दनाक हमला हुआ था, जिसमें 26 मासूम नागरिकों की जान चली गई थी। इस हमले ने देश में आक्रोश पैदा कर दिया, जिसके जवाब में भारत ने 6-7 मई 2025 की रात को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया।
यह कोई साधारण कार्रवाई नहीं थी। भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल किया। चार दिनों तक चले इस भीषण सैन्य अभियान के बाद, आखिरकार 10 मई 2025 को भारत और पाकिस्तान युद्धविराम पर सहमत हुए। भारत के आधिकारिक आंकड़ों और बयानों के अनुसार, यह समझौता दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMOs) के बीच सीधी बातचीत का नतीजा था। इसमें किसी बाहरी मध्यस्थ की जगह नहीं थी। (सोचिए, जब दोनों सेनाएं आपस में बात कर रही थीं, तो वाशिंगटन में बैठे किसी व्यक्ति का श्रेय लेना कितना अजीब लगता है)।
ट्रंप के दावों और अमेरिकी हस्तक्षेप की हकीकत
बेशक, तनाव के समय में अमेरिका ने शांति की अपील की थी। जेडी वेंस (उपराष्ट्रपति) और मार्को रूबियो (विदेश मंत्री) ने दोनों पक्षों से तनाव कम करने का आग्रह किया था। लेकिन अपील करना और युद्धविराम करवाने का श्रेय लेना, दोनों में जमीन-आसमान का अंतर है।
भारतीय मीडिया की रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत ने आधिकारिक घोषणा तक नहीं की थी और ट्रंप ने तुरंत दावा ठोक दिया कि उन्होंने दोनों देशों को युद्ध रोकने के लिए "मजबूर" किया। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि अगर वह बीच में नहीं आते, तो यह मामला परमाणु युद्ध में बदल सकता था। यह दावा जितना नाटकीय था, उतना हीतथ्यों से दूर था।
'हेलहोल' कमेंट और भारत का कड़ा जवाब
बात सिर्फ युद्धविराम तक नहीं रुकी। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया जिसमें भारत और चीन को "हेलहोल" (hellholes) कहा गया था। यह विवाद अमेरिका की 'जन्मसिद्ध नागरिकता' (birthright citizenship) नीति की चर्चा के दौरान शुरू हुआ। पोस्ट में आरोप लगाया गया कि इन "नरक जैसे" देशों के लोग सिर्फ इसलिए अमेरिका आते हैं ताकि उनके बच्चों को अमेरिकी पासपोर्ट मिल सके।
भारत सरकार ने इस पर अपनी नाराजगी जताते हुए इसे "दुर्भाग्यपूर्ण और तथ्यों से परे" करार दिया। आधिकारिक सूत्रों ने स्पष्ट किया कि किसी भी देश की सभ्यता और गरिमा को ऐसी अपमानजनक भाषा से नहीं मापा जा सकता। यह एक बड़ा कूटनीतिक झटका था, क्योंकि आमतौर पर भारत अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ बेहद संतुलित भाषा का उपयोग करता है।
रणनीतिक साझेदारी पर गहराता संकट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में साफ कर दिया कि पाकिस्तान के साथ सैन्य संघर्ष रोकने का निर्णय पूरी तरह स्वतंत्र था। जानकारों का मानना है कि मोदी जी की "रणनीतिक धैर्य" (strategic patience) ही है कि दोनों देशों के रिश्ते अभी तक पूरी तरह नहीं टूटे हैं।
लेकिन सवाल यह है कि क्या अमेरिका अब भारत को एक दोस्त के बजाय प्रतिद्वंद्वी के रूप में देख रहा है? कुछ विश्लेषकों ने ट्रंप के इस रवैये की तुलना पूर्व राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन की उस नीति से की है, जिसका मकसद भारत के उभार को रोकना था। भारत की बढ़ती आर्थिक और सैन्य ताकत शायद वाशिंगटन में कुछ लोगों को खटक रही है।
कुल मिलाकर, अगर अमेरिका अपने दोस्तों के साथ इसी तरह का व्यवहार जारी रखता है, तो भारत को अपनी विदेश नीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है। फिलहाल, गेंद अमेरिका के पाले में है कि वह अपनी कूटनीति को सुधारता है या फिर अहंकार में रिश्तों को दांव पर लगाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
भारत-पाकिस्तान युद्धविराम कब और कैसे हुआ?
यह युद्धविराम 10 मई 2025 को हुआ। यह अप्रैल 2025 में पहलगाम हमले और उसके बाद भारत द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद आया। यह समझौता दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMOs) के बीच सीधी बातचीत के जरिए हुआ था, जिसमें किसी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं थी।
डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के बारे में क्या विवादित टिप्पणी की?
ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट साझा किया था जिसमें भारत और चीन को "हेलहोल" (hellholes) कहा गया था। यह टिप्पणी अमेरिकी जन्मसिद्ध नागरिकता नीति के संदर्भ में की गई थी, जिसमें प्रवासियों द्वारा अमेरिकी पासपोर्ट लेने की कोशिश को लेकर नाराजगी जताई गई थी।
ऑपरेशन सिंदूर क्या था और इसे क्यों शुरू किया गया?
ऑपरेशन सिंदूर 6-7 मई 2025 की रात को शुरू हुआ एक सैन्य अभियान था। इसे 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए हमले के जवाब में शुरू किया गया था, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे। इस ऑपरेशन के तहत भारत ने ड्रोन और मिसाइलों से पाकिस्तान और PoK में आतंकी ठिकानों को तबाह किया था।
ट्रंप के दावों पर भारत सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया क्या थी?
भारत सरकार ने ट्रंप के युद्धविराम के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में स्पष्ट किया कि निर्णय स्वतंत्र था। वहीं, 'हेलहोल' टिप्पणी पर भारत ने इसे "अपमानजनक और दुर्भाग्यपूर्ण" बताते हुए कड़ा कूटनीतिक विरोध दर्ज कराया।