उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अपने ट्रिलियन डॉलर के आर्थिक लक्ष्य के लिए एक ऐसी रणनीति शुरू कर दी है, जिसमें दूर-दराज के देशों के निवेशकों को बुलाना ही नहीं, बल्कि उनकी रुचि को समझकर उनके साथ बातचीत करना शामिल है। इन्वेस्ट यूपी की पांच सदस्यीय टीम अगले सप्ताह सिंगापुर की यात्रा पर निकल रही है, जहां वह दो दिन रुकेगी, फिर जापान के टोक्यो में तीन दिन तक काम करेगी। इसके बाद, दक्षिण कोरिया की यात्रा भी तय है। टीम की अगुवाई शशांक चौधरी, इन्वेस्ट यूपी के सीईओ, करेंगे। ये दौरे सिर्फ बैठकों का सिलसिला नहीं — ये एक बड़े निवेश अभियान का पहला चरण है।
क्यों सिंगापुर, जापान और दक्षिण कोरिया?
ये तीन देश दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते तकनीकी और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्थाओं में से हैं। सिंगापुर आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स और वित्तीय सेवाओं में विश्व नेता है। जापान और दक्षिण कोरिया दोनों सेमीकंडक्टर चिप्स, ग्रीन हाइड्रोजन और उन्नत उत्पादन तकनीकों में अग्रणी हैं। इन्वेस्ट यूपी के अधिकारियों का कहना है कि इन क्षेत्रों में कई कंपनियां पहले से ही भारत में निवेश के लिए दिलचस्पी दिखा रही हैं — बस उन्हें एक विश्वसनीय और सुविधाजनक स्थान की जरूरत है।
क्या ये सिर्फ एक अवसर है? नहीं। ये एक अवसर का बड़ा संकल्प है। उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था अभी 450 बिलियन डॉलर के आसपास है। एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने के लिए, हर साल लगभग 55 बिलियन डॉलर का निवेश चाहिए — जो एक असंभव लगता है, लेकिन अगर दक्षिण कोरिया की कोई एक बड़ी कंपनी, जैसे सैमसंग या एचएलएस, यहां एक ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट लगाए, तो वह अकेली ही इस लक्ष्य का एक बड़ा हिस्सा पूरा कर सकती है।
क्या निवेशकों को कुछ खास प्रोत्साहन मिलेगा?
हां। राज्य सरकार ने एक गुप्त योजना बनाई है — जिसे अभी तक किसी ने खुलकर नहीं बताया। ये है लैंडबैक। निवेशकों को भूमि आवंटित करने के बाद, उन्हें उसी भूमि पर निर्माण के बाद निवेश के एक निश्चित प्रतिशत के बराबर अतिरिक्त भूमि या वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा। ये कोई नया विचार नहीं — गुजरात और तमिलनाडु ने इसे सफलतापूर्वक अपनाया है। लेकिन उत्तर प्रदेश अभी तक इस तरह की नीति नहीं लाया था। ये एक बड़ा संकेत है कि सरकार अब सिर्फ बातें नहीं, बल्कि नतीजे देने को तैयार है।
इसके अलावा, राज्य सरकार ग्रीन हाइड्रोजन के लिए दो नए सेंटर ऑफ ऐक्सिलेंस खोलने की तैयारी कर रही है। एक इंदौर और दूसरा लखनऊ के पास हो सकता है। ये केंद्र न केवल अनुसंधान करेंगे, बल्कि निवेशकों को तकनीकी सहायता, प्रमाणन और सरकारी अनुमतियों की त्वरित प्रक्रिया भी देंगे। ये वही चीज है जो जापानी कंपनियों को आकर्षित करती है — जो अपने घर पर भी इसके लिए समय और पैसा खर्च करती हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विदेश यात्रा का रास्ता कैसे तय होगा?
ये टीम सिर्फ बातचीत करने नहीं जा रही — ये रिपोर्ट लाने जा रही है। इन्वेस्ट यूपी के अधिकारी अगले 15 दिनों में एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगे, जिसमें ये बताया जाएगा कि किन कंपनियों ने किस क्षेत्र में निवेश की इच्छा जताई है, कितनी निवेश राशि का अनुमान है, और किन शर्तों पर वे तैयार हैं। इसके आधार पर ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी विदेश यात्रा की तारीख और दौरे का आखिरी रूप तय करेंगे।
लाइव हिंदुस्तान के स्रोतों के अनुसार, योगी स्वयं सिंगापुर और जापान की यात्रा पर जाएंगे — शायद अगले दो महीनों में। उनके साथ कई मंत्री भी जाएंगे — वित्त, उद्योग, विदेश और ऊर्जा। ये बात बहुत महत्वपूर्ण है। जब एक मुख्यमंत्री विदेश जाते हैं, तो वहां की कंपनियां समझती हैं कि ये सिर्फ एक बातचीत नहीं, बल्कि एक निर्णय है।
क्या ये रणनीति पहले भी काम कर चुकी है?
हां। 2022 में, जब इन्वेस्ट यूपी ने जापान का दौरा किया था, तो तीन जापानी कंपनियों ने ग्रीन हाइड्रोजन पर 1,200 करोड़ रुपये का निवेश करने की घोषणा की थी। एक ने लखनऊ के पास एक हाइड्रोजन फ्यूल स्टेशन बनाने का फैसला किया। अब ये वही रिश्ता आगे बढ़ाया जा रहा है।
इस बार टीम का ध्यान अधिक विशिष्ट है — सेमीकंडक्टर। दुनिया भर में चिप्स की कमी के कारण उत्पादन रुक गया। भारत अब इस क्षेत्र में खुद को एक वैकल्पिक केंद्र बनाना चाहता है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ-गाजियाबाद-नोएडा त्रिकोण में एक चिप निर्माण पार्क बनाने की बात चल रही है। ये बहुत बड़ी बात है — ऐसा पार्क अभी तक भारत में कहीं नहीं है।
क्या ये सब आम आदमी के लिए क्या बदलाव लाएगा?
कई तरह से। जब एक बड़ी कंपनी यहां आती है, तो वह नौकरियां देती है — न केवल इंजीनियरों के लिए, बल्कि टेक्नीशियन, लॉजिस्टिक्स, और सेवा कर्मचारियों के लिए। एक ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट के लिए अकेले 5,000 से 8,000 सीधी नौकरियां बन सकती हैं। और जब निवेश बढ़ता है, तो राज्य की आय बढ़ती है — जिससे स्कूल, अस्पताल और सड़कों पर खर्च करने के लिए पैसा मिलता है।
और ये सिर्फ आर्थिक बदलाव नहीं। ये एक नए विश्वास का संकेत है — कि उत्तर प्रदेश, जिसे पहले बस एक बड़ा राज्य माना जाता था, अब एक निवेश योग्य वैश्विक हब बन रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इन्वेस्ट यूपी की यात्रा का लक्ष्य क्या है?
इन्वेस्ट यूपी की टीम का लक्ष्य सिंगापुर, जापान और दक्षिण कोरिया से सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन और आईटी इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में निवेश आकर्षित करना है। ये तीन क्षेत्र भविष्य के उद्योगों के आधार हैं, और उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए इन्हीं क्षेत्रों से बड़े निवेश की जरूरत है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विदेश यात्रा कब होगी?
मुख्यमंत्री की यात्रा अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुई है, लेकिन अगले दो महीनों में सिंगापुर और जापान की यात्रा की संभावना है। यह टीम की रिपोर्ट के आधार पर तय होगी, जिसमें निवेशकों के आकलन और उनकी शर्तों का विश्लेषण होगा।
लैंडबैक क्या है और ये कैसे काम करेगा?
लैंडबैक एक ऐसी योजना है जिसमें निवेशक को भूमि आवंटित करने के बाद, उसके निवेश के एक निश्चित प्रतिशत (जैसे 10-15%) के बराबर अतिरिक्त भूमि या वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाता है। ये निवेशकों के लिए लाभ बढ़ाता है और उन्हें लंबे समय तक रुकने के लिए प्रेरित करता है।
क्या उत्तर प्रदेश में सेमीकंडक्टर पार्क बनेगा?
हां, लेकिन अभी यह योजना ही है। लखनऊ-गाजियाबाद-नोएडा क्षेत्र में एक सेमीकंडक्टर पार्क बनाने की बात चल रही है, जो भारत का पहला ऐसा पार्क होगा। इसके लिए अभी भूमि और बुनियादी ढांचे की तैयारी शुरू हो चुकी है।
ग्रीन हाइड्रोजन क्यों इतना महत्वपूर्ण है?
ग्रीन हाइड्रोजन भविष्य की साफ ऊर्जा है — ये विद्युत के जरिए पानी को तोड़कर बनाया जाता है, और इसका उत्पादन कार्बन मुक्त होता है। जापान और दक्षिण कोरिया इसे अपनी ऊर्जा सुरक्षा का हिस्सा बना रहे हैं। उत्तर प्रदेश इस क्षेत्र में निवेश आकर्षित करके एक नई ऊर्जा अर्थव्यवस्था का निर्माण करना चाहता है।
इस अभियान से सामान्य नागरिकों को क्या फायदा होगा?
नए उद्योग लाखों नौकरियां बनाएंगे — इंजीनियरों से लेकर लॉजिस्टिक्स और सेवा कर्मचारियों तक। राज्य की आय बढ़ने से शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ेगा। ये सिर्फ आर्थिक बदलाव नहीं, बल्कि एक नए विश्वास की शुरुआत है — कि उत्तर प्रदेश अब भारत का निवेश का दरवाजा है।
Sandeep YADUVANSHI
दिसंबर 9, 2025 AT 21:17अरे भाई, ये सब तो बस एक नए ब्रांडिंग कैंपेन का नाम है। सिंगापुर और जापान के निवेशक इस तरह के वादों से घबरा चुके हैं। जब तक उत्तर प्रदेश में बिजली की आपूर्ति 24x7 नहीं होगी, तब तक कोई चिप प्लांट नहीं लगेगा। ये सब फोटोशूट है, न कि रणनीति।
Vikram S
दिसंबर 10, 2025 AT 01:20ये सब बकवास है। एक ट्रिलियन डॉलर? तुम्हारे राज्य में अभी भी गांवों में पानी की बर्बादी हो रही है, और तुम चिप्स की बात कर रहे हो? भारत का निवेश बढ़ाने के लिए पहले अपने अंदर की बुनियादी ढांचे को सुधारो। ये लैंडबैक जैसी चीजें तो गुजरात में भी अब चल रही हैं, और वहां तो कोई बात नहीं है।
nithin shetty
दिसंबर 11, 2025 AT 11:38लैंडबैक तो अच्छा आइडिया है, पर क्या इसका मतलब है कि निवेशक को भूमि मिलेगी और फिर उसका 15% और भी? ये तो अब तक किसी ने नहीं बताया कि ये भूमि कहां होगी? क्या ये फार्मलैंड होगा? या फिर किसी किसान की जमीन? ये बात तो साफ कर दो।
Aman kumar singh
दिसंबर 13, 2025 AT 03:40ये बहुत बड़ी बात है। उत्तर प्रदेश अब सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि भारत का नया उद्योग दरवाजा बन रहा है। जापान और दक्षिण कोरिया के साथ ये साझेदारी भारत के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है। हम अब बस बाजार नहीं, बल्कि भविष्य का निर्माण कर रहे हैं। ग्रीन हाइड्रोजन और चिप्स के साथ, हम दुनिया के टॉप टेक नेटवर्क में शामिल हो रहे हैं। जय हिंद।
UMESH joshi
दिसंबर 14, 2025 AT 19:04मुझे लगता है कि इस रणनीति में एक गहरा विचार है। जब तक हम अपने निवेशकों को एक विश्वसनीय और स्थायी वातावरण नहीं देंगे, तब तक कोई बड़ा निवेश नहीं आएगा। लैंडबैक और सेंटर ऑफ ऐक्सिलेंस जैसी चीजें दिखाती हैं कि सरकार सिर्फ बातें नहीं, बल्कि सिस्टम बना रही है। ये धीमा है, लेकिन सही दिशा में है।
pradeep raj
दिसंबर 15, 2025 AT 00:58इस अभियान के तहत, निवेशकों के लिए एक एकीकृत निर्णय लेने की प्रक्रिया का निर्माण हो रहा है, जिसमें तकनीकी सहायता, सरकारी अनुमतियों की त्वरित प्रक्रिया, और भूमि आवंटन के साथ लैंडबैक जैसे अतिरिक्त प्रोत्साहन शामिल हैं। ये एक व्यापक इकोसिस्टम है जो उच्च-तकनीकी उद्योगों के लिए आवश्यक है, क्योंकि इन कंपनियों को न केवल भूमि चाहिए, बल्कि एक स्थिर, निरंतर और अनुकूलित निवेश वातावरण चाहिए।
Vishala Vemulapadu
दिसंबर 15, 2025 AT 07:22चिप्स के लिए पार्क? अरे भाई, तुम्हारे यहां तो इंटरनेट भी अच्छा नहीं चलता। ये सब तो बस एक ड्रीम प्रोजेक्ट है। जापानी कंपनियां तो अपने घर पर ही अपने चिप्स बना रही हैं। ये लैंडबैक क्या है? जमीन दोगे तो फिर उसे लौटा दोगे? बहुत आसानी से नहीं चलेगा।
Krishnendu Nath
दिसंबर 15, 2025 AT 23:29ये बहुत बढ़िया है भाई! अब तक तो सिर्फ बातें होती रहीं, अब तो एक्शन हो रहा है। ग्रीन हाइड्रोजन और चिप्स भारत का भविष्य है। जल्दी से ये पार्क बन जाए, और हम दुनिया को दिखा दें कि UP भी कुछ कर सकता है। जय उत्तर प्रदेश!
Boobalan Govindaraj
दिसंबर 16, 2025 AT 01:49ये तो बहुत अच्छा हुआ भाई। मैं तो सोच रहा था कि कब तक हम बस बातें ही करते रहेंगे। अब तो निवेश आएगा, नौकरियां बनेंगी, और बच्चे बड़े होकर अपने घर के पास ही काम करेंगे। ये बदलाव हमारे बच्चों के लिए है। जय हिंद।
mohit saxena
दिसंबर 16, 2025 AT 23:22लैंडबैक का आइडिया तो बहुत अच्छा है। लेकिन इसे लागू करने के लिए एक स्पष्ट गाइडलाइन चाहिए। अगर ये बहुत अधिक भूमि दे दी जाए, तो ये लैंड स्पेकुलेशन का कारण बन सकता है। एक ट्रांसपेरेंट फ्रेमवर्क बनाना जरूरी है।
Shraddhaa Dwivedi
दिसंबर 18, 2025 AT 00:17अगर ये अभियान सफल हुआ, तो ये न केवल उत्तर प्रदेश के लिए, बल्कि पूरे भारत के लिए एक नया मॉडल बनेगा। हमने अभी तक निवेश के लिए टैक्स छूट दी है, लेकिन अब तो हम एक वास्तविक सहयोगी बनने जा रहे हैं। ये एक नए युग की शुरुआत है।