अगर आप शेयर बाजार में नया अवसर ढूँढ रहे हैं तो साई लाइफ साइंसेज का आईपीओ आपके ध्यान में आ सकता है। यह कंपनी बायोटेक्नोलॉजी और फार्मास्यूटिकल्स में काम करती है, इसलिए इसे “हेल्थ‑टेक” सेक्टर का खिलाड़ी माना जाता है। कई लोग पूछते हैं – आईपीओ क्या है, इस कंपनी का प्राइस बैंड कितना है और मैं इसे आसानी से कैसे खरीद सकता हूँ? नीचे हम सारे सवालों के जवाब देंगे, ताकि आप बिना झंझट के फैसलों तक पहुँच सकें।
साई लाइफ साइंसेज ने अपना सार्वजनिक ऑफरिंग 30 सितंबर को किया। मूल्य सीमा ₹850 से ₹900 के बीच तय की गई थी, यानी निवेशकों को प्रति शेयर इस रेंज में खरीदना था। कुल 10 लाख शेयरों की इश्यू की गई, जिससे कंपनी को लगभग ₹85 करोड़ की पूँजी मिल रही है। इस राशि का इस्तेमाल नई रिसर्च लैब खोलने, मौजूदा प्रोडक्ट लाइन्स को स्केलेबल बनाने और कुछ छोटे‑बड़े अधिग्रहण पर किया जाएगा।
सब्सक्रिप्शन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन हुई। इंटरेस्टेड निवेशकों को लिंक्ड ब्रोकर्स या ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए एप्लिकेशन फॉर्म भरना था। मार्केटिंग अवधि के दौरान कई बड़े ब्रोकरों ने इस आईपीओ को अपने ग्राहक आधार में प्रमोट किया, इसलिए ट्रैफ़िक बहुत हाई रहा। सब्सक्रिप्शन क्लोज़ होने के बाद शेयरों को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर लिस्ट किया गया।
पहला कदम है – अपने ब्रोकरेज अकाउंट को अपडेटेड रखना। अगर आपका KYC अभी तक फुल नहीं है तो वो पूरा कर लें, नहीं तो एप्लिकेशन रजेक्ट हो सकता है। दूसरा, प्राइस बैंड के बारे में सोचें: अगर आप लोअर बाउंड (₹850) से ज्यादा रेट पर खरीदते हैं तो आपका एंट्री प्राइस बढ़ जाएगा, इसलिए अपने बजट के हिसाब से स्टेप‑वाइज एंट्री की योजना बनाना समझदारी है।
तीसरा, कंपनी की फाइनेंशियल्स को देखें। साई लाइफ साइंसेज ने पिछले साल ₹120 करोड़ का टर्नओवर किया, लेकिन अभी भी प्रॉफिट नहीं बना पाई है। इसका मतलब है कि आपका निवेश जॉइंट वैल्यू पर बेस्ड हो सकता है, पर रिटर्न टाइमलाइन लंबी हो सकती है। इसलिए दीर्घकालिक निवेशकों के लिए ये बेहतर विकल्प हो सकता है।
चौथा, मार्केट सेंटिमेंट को समझें। बायोटेक IPO अक्सर हाइ‑वोलैटिलिटी दिखाते हैं, खासकर अगर कोई नई ड्रग या क्लिनिकल ट्रायल का अपडेट आया हो। ऐसे में छोटे‑छोटे एंट्री लेवल बनाकर जोखिम कम किया जा सकता है।
पाँचवा, पोस्ट‑ऑफ़रिंग में शेयर की लिक्विडिटी को देखते रहें। अगर लिस्टिंग के बाद ट्रेडिंग वॉल्यूम कम रहता है तो आप शेयर को जल्दी नहीं बेच पाएंगे। इसलिए आरंभिक कुछ हफ्तों में वॉल्यूम को मॉनिटर करना और उचित प्राइस पर डिस्पोज़ल करना जरूरी है।
सारांश में, साई लाइफ साइंसेज आईपीओ एक दिलचस्प अवसर है, पर इसे समझदारी से एनालाइज़ करना ज़रूरी है। अपने रिस्क प्रोफ़ाइल, निवेश horizon और फंडिंग जरूरतों को ध्यान में रखकर एंट्री पॉइंट चुनें। अगर आप अभी भी संकोच में हैं, तो छोटे हिस्से से शुरू करके धीरे‑धीरे पोजीशन बढ़ा सकते हैं। याद रखें – शेयर बाजार में कोई फ्री लंच नहीं, हर निर्णय से पहले पूरी जानकारी जुटाएँ।
साई लाइफ साइंसेज का ₹3,042.62 करोड़ आईपीओ, जिसकी सदस्यता 11 से 13 दिसंबर तक खुली थी, का अलॉटमेंट सोमवार, 16 दिसंबर, 2024 को फाइनल हो सकता है। आईपीओ को 10.26 गुना ओवरसब्सक्रिप्शन मिला था। निवेशक अपनी स्थिति की जांच KFin टेक्नोलॉजीज या NSE व BSE के आधिकारिक वेबसाइट्स पर कर सकते हैं। शेयर लिस्टिंग 18 दिसंबर को NSE और BSE पर होगी, जहां ग्रे मार्केट प्रीमियम के अनुसार शेयर ₹610 पर सूचीबद्ध हो सकते हैं।