डिजिटल एक्सेस के माध्यम से ग्रामीण भारत को सशक्त बनाना

डिजिटल एक्सेस के माध्यम से ग्रामीण भारत को सशक्त बनाना

भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल एक्सेस के माध्यम से सशक्तिकरण एक महत्वपूर्ण कदम है। कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) इस दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

CSC केंद्रों के माध्यम से रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं और विभिन्न डिजिटल सेवाओं का लाभ भी उठाया जा रहा है। इन केंद्रों का संचालन CSC ई-गवर्नेंस SPV के तत्वावधान में किया जाता है, जो IT मंत्रालय के अंतर्गत आता है।

परिचय

भारत का ग्रामीण क्षेत्र देश की आत्मा है, जहां करोड़ों लोग बसते हैं और विभिन्न प्रकार के व्यवसाय चलाते हैं। लेकिन, हमेशा से यहां सटीक और सार्थक सेवाओं की कमी महसूसी जाती रही है। डिजिटल युग में यह कमी अभी भी कुछ हद तक बनी हुई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र की प्रगति धीमी हो रही है। यही वह समय है जब कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) जैसे प्लेटफॉर्म ग्रामीण भारत को सामर्थ्यवान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

CSC की शुरुआत का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण समुदायों तक डिजिटल सेवाएं और सरकारी योजनाओं के लाभ पहुंचाना था। ई-गवर्नेंस के तत्वावधान में इन केंद्रों ने एक नया अध्याय लिखा है, जिसमें वे न केवल डिजिटल सेवाएं बल्कि रोजगार के अवसर भी प्रदान करते हैं। वर्तमान समय में, CSC केंद्र लगभग हर ग्रामीण क्षेत्र में उपस्थित हैं, और ये केंद्र 500 से अधिक सेवाएं प्रदान करते हैं जो आम जनता के लिए अत्यधिक लाभदायक साबित हो रहे हैं।

CSC केंद्र न सिर्फ सरकारी सेवाओं को लोगों तक पहुंचाते हैं, बल्कि कई अन्य प्रकार की सेवाएं भी प्रदान करते हैं। एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ये केंद्र आईटी और संचार प्रौद्योगिकी के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों को शहरों की तर्ज पर डिजिटल सेवाओं से जोड़ रहे हैं। इससे ग्रामीण नागरिक न सिर्फ सरकारी योजनाओं का लाभ उठा पाते हैं, बल्कि वे डिजिटल माध्यमों से अपने व्यवसाय को भी बढ़ावा दे सकते हैं।

आप सोच सकते हैं कि इतने सारे सेवाओं के संचालन के पीछे का तंत्र क्या है। दरअसल, CSC केंद्रों का संचालन CSC ई-गवर्नेंस के तहत एक विशेष उद्देश्य वाहन (SPV) द्वारा किया जाता है, जो भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्रालय के अंतर्गत आता है। इसके माध्यम से की गई पहलों ने लाखों लोगों की ज़िंदगियों को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है।

"CSC केंद्रों ने देश की जनता को डिजिटल साक्षरता की दिशा में बड़ा कदम उठाने का अवसर दिया है," – इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्रालय।

ग्रामीण क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं का हल निकालने के लिए और उन्हें डिजिटल सेवाओं का लाभ पहुंचाने के लिए CSC केंद्र एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में उभरकर सामने आए हैं। यह डिजिटल समावेशन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो सरकारी योजनाओं को जरूरमंदों तक पहुंचाने में सफल हो रहा है।

इतना ही नहीं, CSC केंद्रों के माध्यम से सहज और सस्ती डिजिटल सेवाओं का भी लाभ उठाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, आधार सेवाएं, पैन कार्ड अप्लिकेशन, पासपोर्ट सेवाएं, डिजी लॉकर, डिजिटल भुगतान सेवाएं आदि मुख्य सेवाओं में शामिल हैं। इन सेवाओं के माध्यम से ग्रामीण नागरिक अपनी सभी आवश्यकताएं बिना किसी बाधा के पूरी कर सकते हैं।

कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) का महत्व

कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) ग्रामीण भारत में डिजिटल परिवर्तन का प्रतीक बन गए हैं। ये केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों के सबसे प्रभावशाली बदलावों में से एक हैं। CSC का मिशन है कि वे सरकारी सेवाओं को डिजिटल माध्यम से हर नागरिक के दरवाजे तक पहुंचाएं। इन केंद्रों के माध्यम से, न केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाती है, बल्कि नागरिकों को विभिन्न सेवाएं भी प्रदान की जाती हैं।

CSC केंद्रों ने अब तक 500 से अधिक सेवाएं प्रदान की हैं, जो कि रोजगार अवसरों से लेकर डिजिटलीकरण तक विस्तृत हैं। इन सेवाओं में जनधन योजना, पेंशन, आधार कार्ड, पासपोर्ट, और डिजिटल भुगतान आदि शामिल हैं।

रोजगार के अवसर

CSC केंद्र रोजगार के नए द्वार खोल रहे हैं। यहां कार्यरत VLE (Village Level Entrepreneurs) को अपने व्यवसाय का संचालन करने का मौका मिलता है। इसके माध्यम से न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरती है, बल्कि अन्य ग्रामीणों के लिए भी आजीविका के नए रास्ते खुलते हैं।

“CSC ने मेरे गांव में पहली बार डिजिटल सेवाओं को पहुंचाया। इससे हम न सिर्फ सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं, बल्कि रोज़गार के नए अवसर भी मिल रहे हैं।” — एक ग्रामवासी

सरकारी योजनाओं की सूचना और लाभ

CSC केंद्रों का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है सरकारी योजनाओं और सेवाओं को गांव के हर व्यक्ति तक पहुंचाना। इसके माध्यम से लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, वित्तीय समावेशन और कौशल विकास जैसी सेवाएं भी आसानी से उपलब्ध होती हैं।

डिजिटल सेवाएं

डिजिटल भारत अभियान के तहत CSC केंद्र डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं। यहां चलने वाले कार्यक्रमों और कार्यशालाओं से ग्रामीणों को कंप्यूटर और इंटरनेट का ज्ञान मिलता है। इससे वे न सिर्फ अपने क्षेत्र में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी नए अवसरों की तलाश कर सकते हैं।

CSC केंद्रों के माध्यम से अब तक लाखों लोगों की जिन्दगी बदली जा चुकी है। इन केंद्रों ने ग्रामीण भारत में डिजिटलीकरण को एक नयी दिशा दी है और यह सुनिश्चित किया है कि डिजिटल सेवाओं का लाभ गांव के हर व्यक्ति तक पहुंचे।

डेटा और सांख्यिकी

2023 तक, CSC केंद्र भारत के 765 जिलों में 2,50,000 से अधिक स्थानों पर फैले गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से लगभग 64 लाख से भी अधिक लोगों को कानूनी परामर्श प्रदान किया जा चुका है। इसके साथ ही, इन केंद्रों ने 46 लाख से अधिक डिजिटल लेनदेन भी सफलतापूर्वक पूरी की हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में CSC केंद्र न केवल सेवाओं का वितरण करते हैं, बल्कि सामुदायिक सशक्तिकरण और विकास का भी एक प्रमुख आधार बन गए हैं।

टेली-लॉ योजना

टेली-लॉ योजना

टेली-लॉ योजना, जो 2017 में शुरू की गई थी, ग्रामीण भारत में कानूनी सेवाओं को सरल और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण जनता को कानूनी सलाह और सहायता प्रदान करना है, जिससे वे न्याय प्रणाली का सही तरीके से लाभ उठा सकें। इस योजना के तहत, डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाता है, जिससे लोग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वकीलों से सलाह प्राप्त कर सकते हैं।

टेली-लॉ योजना के तहत, विभिन्न जिलों में 2,50,000 से अधिक CSC केंद्र स्थापित किए गए हैं, जो इस सेवा को लोगों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। 2023 के अप्रैल महीने तक, 65 लाख से अधिक मामलों का पंजीकरण हो चुका है और 64 लाख से अधिक लोगों को कानूनी सलाह प्रदान की जा चुकी है। यह योजना खासकर उन महिलाओं और कमजोर वर्गों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है, जो अन्यथा वकीलों तक पहुंचने में सक्षम नहीं होते।

इस योजना का मुख्य आकर्षण यह है कि यहां पर कानूनी सलाह पूरी तरह मुफ्त में दी जाती है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा आसानी से उपलब्ध होती है और इससे लोगों के समय और पैसे दोनों की बचत होती है। इसका मतलब यह है कि ग्रामीण इलाकों में रहने वाला कोई भी व्यक्ति आसानी से अपने मुद्दे का समाधान प्राप्त कर सकता है, और उसे शहर तक जाने की आवश्यकता नहीं होती।

"टेली-लॉ ने हमारे गांव की महिलाओं को एक नई ताकत दी है। अब वे बिना डरे अपने हक के लिए लड़ सकती हैं।" - सरपंच, खेडकी गांव

टेली-लॉ योजना के अन्य लाभों में सामुदायिक जागरूकता भी शामिल है। CSC केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में कानूनी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जहां लोग अपने अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में जान सकते हैं। इससे समाज में न्याय के प्रति समझ बढ़ती है और लोग अपने हक के लिए आवाज उठाने में सक्षम होते हैं।

टेली-लॉ योजना के तहत, कई प्रकार की कानूनी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जिनमें संपत्ति विवाद, घरेलू हिंसा, श्रम कानून, उपभोक्ता संरक्षण आदि शामिल हैं। इसके अलावा, इन सेवाओं का लाभ उठाने के लिए लोगों को विशेष रूप से प्रशिक्षित भी किया जाता है। वेबिनार और वर्कशॉप का आयोजन भी होता है, जहां पर लोगों को डिजिटल साक्षरता और कानूनी जानकारी दोनों प्रदान की जाती है।

संपूर्ण रूप से देखा जाए तो, टेली-लॉ योजना ने ग्रामीण भारत में न्याय प्रणाली को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। लोगों को कानूनी सेवाओं की पहुंच में सुधार हुआ है और न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता आई है। यह योजना वास्तव में भारतीय गांवों में एक डिजिटल और सामाजिक क्रांति लेकर आई है।

ऑनलाइन रिज्यूमे मेकर टूल

आज के डिजिटल युग में, रोजगार पाने के लिए एक अच्छा रिज्यूमे होना बहुत जरूरी है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कई व्यक्तियों के पास ऐसा रिज्यूमे बनाने के लिए आवश्यक साधन या कौशल नहीं होते हैं। इसी समस्या को हल करने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) ने एक अनोखा ऑनलाइन रिज्यूमे मेकर टूल पेश किया है।

यह टूल एक मुफ्त सेवा है जो हर व्यक्ति को अपनी शिक्षा और अनुभव के आधार पर एक पेशेवर रिज्यूमे बनाने में मदद करता है। उपयोगकर्ता को केवल आवश्यक जानकारी भरनी होती है और यह टूल स्वचालित रूप से उस जानकारी को एक सुंदर और पेशेवर रुप में प्रस्तुत करता है।

इस सेवा का उपयोग करना बहुत आसान है। सबसे पहले, आपको अपने नजदीकी CSC केंद्र में जाना होगा। वहां पर उपस्थित कर्मचारी आपको इस टूल के उपयोग के बारे में पूरी जानकारी देंगे और आपके लिए एक खाता बनाएंगे। एक बार खाता बनाने के बाद, आप इस टूल का उपयोग कर सकते हैं और जब चाहे तब अपने रिज्यूमे को अपडेट भी कर सकते हैं।

इस टूल की एक सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले कई लोग अंग्रेजी में सहज नहीं होते, इसलिए यह टूल उन्हें उनकी मातृभाषा में रिज्यूमे बनाने की सुविधा प्रदान करता है। एक सेवा उपयोगकर्ता ने बताया, "यह टूल मेरी जिंदगी बदलने वाला साबित हुआ। मुझे अब नौकरी पाने में आसानी हो रही है।"

"यह टूल मेरी जिंदगी बदलने वाला साबित हुआ। मुझे अब नौकरी पाने में आसानी हो रही है।" - सेवा उपयोगकर्ता

जो भी व्यक्ति इस टूल का उपयोग करता है, उसे केवल बुनियादी जानकारी ही नहीं मिलती, बल्कि पेशेवर सलाह भी प्राप्त होती है। CSC के कर्मचारी हर कदम पर मदद करते हैं ताकि उपयोगकर्ता का रिज्यूमे बेहतरीन बने।

न केवल यह टूल रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देता है, बल्कि ग्रामीण भारत के लोगों में आत्मविश्वास भी बढ़ाता है। अब उन्हें लगता है कि वे भी अपने कौशल और शिक्षा के आधार पर एक अच्छी नौकरी प्राप्त कर सकते हैं।

डेटा और आंकड़ों के अनुसार, इस सेवा का उपयोग करके अब तक लाखों लोगों ने अपने रिज्यूमे बनाए हैं। यह सेवा विशेष रूप से उन युवाओं के लिए लाभकारी साबित हो रही है जो पहली बार नौकरी की तलाश में हैं।

CSC सेंटर इस टूल के माध्यम से न केवल रोजगार के अवसर बढ़ाने का काम कर रहे हैं, बल्कि डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

कृषि विभाग का योगदान

कृषि विभाग का योगदान

भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि विभाग का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। 2019-20 में स्थापित किए गए CSC ई-गर्वेन्स सेवा के कृषि विभाग ने ग्रामीण भारत में कृषि सेवाओं को एक नई दिशा दी है। इससे न केवल किसानों का जीवन स्तर सुधर रहा है, बल्कि उन्हें डिजिटल माध्यम से नई और उन्नत तकनीकों की जानकारी भी मिल रही है।

कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं ने किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इनमें से एक खास योजना है eAgri पोर्टल, जो किसानों को डिजिटल तरीके से अपने उत्पादों की बिक्री और बायिंग का मौका देता है। यहां पर किसान अपने उत्पादों को ऑनलाइन अपडेट कर सकते हैं और उचित मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। इससे उन्हें मार्केट पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है।

CSC ई-गर्वेन्स सेवा ने कृषि क्षेत्र में फार्मर्स प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (FPO) की स्थापना में भी महत्वपूर्ण काम किया है। ये संगठन किसानों को समूह में खेती करने और उच्च गुणवत्ता वाले बीज और खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने में सहायता करते हैं। इसके साथ ही, बिजनेस ग्रोथ और ब्रांड कोलैबोरेशन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

सबसे खास बात यह है कि कृषि विभाग ने 50,000 से अधिक प्राइमरी एग्रीकल्चर क्रेडिट सोसाइटीज (PACS) को भी CSC नेटवर्क में शामिल किया है। इस नेटवर्क के माध्यम से किसानों को फाइनैंशल ट्रांजैक्शंस और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में आसानी होती है।

"CSC केंद्रों के माध्यम से किसानों को वाजिब मूल्य और तकनीकी सहायता की उपलब्धता सुनिश्चित करना हमारा प्रमुख लक्ष्य है," कहते हैं CSC ई-गवर्नेंस के निदेशक।

CSC के कृषि विभाग ने अब तक 46 लाख से अधिक ट्रांजैक्शंस के माध्यम से किसानों को लाभान्वित किया है। SFAC परियोजना में प्रगति भी उल्लेखनीय है, जिससे किसानों को अपने उत्पादों के लिए नए बाजार मिल रहे हैं। किसानों की उन्नति और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटलाइजेशन का यह सफल उदाहरण है।

ग्रामीण विकास की दिशा में कदम

ग्रामीण भारत में विकास को गति देने के लिए डिजिटल एक्सेस बेहद जरूरी है। इसके लिए विभिन्न योजनाएं और पहल शुरू की गई हैं, जिनमें कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। CSC केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ सीधे नागरिकों तक पहुंचाया जा रहा है। इससे न केवल डिजिटल साक्षरता बढ़ रही है, बल्कि रोजगार के अवसर भी उत्पन्न हो रहे हैं।

CSC के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में कई सेवाएँ प्रदान की जा रही हैं, जैसे कि टेली-लॉ, ऑनलाइन रिज्यूमे मेकर, और कृषि सेवाएँ। इन सेवाओं का प्रभावी उपयोग ग्रामीण जनता की जीवन गुणवत्ता में सुधार ला रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में टेली-लॉ योजना के तहत मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे लोग अपनी समस्याओं का समाधान पा रहे हैं।

महात्मा गांधी ने कहा था,

“ग्राम स्वराज का सपना, गांव-गांव की आत्मनिर्भरता में ही साकार हो सकता है।”
इस उद्धरण से यह स्पष्ट होता है कि ग्रामीण विकास के लिए आत्मनिर्भरता आवश्यक है, और यह आत्मनिर्भरता डिजिटल तकनीकों के माध्यम से ही संभव है।

कृषि विभाग के तहत CSC ई-गवर्नेंस सेवाएं भी उभर रहीं हैं। किसानों को डिजिटल माध्यम से सटीक जानकारी और सलाह उपलब्ध कराना अब संभव हो गया है। मार्केट प्लेस, ई-कॉमर्स जैसे प्लेटफार्म के जरिए किसानों को अपनी पैदावार बेचने में आसानी हो रही है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं के उपयोग से स्वास्थ्य, शिक्षा और वित्त के क्षेत्र में भी बड़े सुधार हो रहे हैं। अब लोग घर बैठे ही सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं, बच्चों की शिक्षा के लिए ऑनलाइन पाठ्यक्रम उपयोग कर सकते हैं, और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए टेली-मेडिसिन का उपयोग कर सकते हैं।

न केवल सरकारी योजनाएं, बल्कि निजी संस्थाएं भी इस दिशा में काम कर रही हैं। सरकारी और निजी सहयोग से ही तकनीकी दृष्टि से अग्रणी समाज का निर्माण हो सकता है। यह डिजिटल सहायक कार्यक्रम ग्रामीण लोगों की जीवनस्तर को उन्नत करने और उन्हें स्वावलंबी बनाने का एक प्रमुख उदाहरण है।

8 Comments

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    vishal singh

    जून 28, 2024 AT 03:20

    ये CSC वाला सब कुछ बहुत अच्छा लगता है... लेकिन असलियत में गांव में इंटरनेट 3G से भी कम है। जब तक बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बनेगा, ये सब डिजिटल नाटक है।

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    mohit SINGH

    जून 29, 2024 AT 16:15

    अरे भाई ये सब फेक है! ये जो कह रहे हैं 64 लाख लोगों को कानूनी सलाह मिली... वो ज्यादातर वो हैं जिन्होंने बस एक बार क्लिक किया और बाद में कभी नहीं आया! ये सिर्फ डेटा बनाने के लिए है, असली इम्पैक्ट नहीं है। इंडिया का डिजिटल ड्रीम? ये तो डिजिटल ड्रीमिंग है!

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    Preyash Pandya

    जुलाई 1, 2024 AT 05:23

    मैंने खुद अपने गांव में CSC का इस्तेमाल किया है 😎 और अरे भाई, ये टेली-लॉ वाला टूल तो बेहतरीन है! मेरी बहन को घरेलू हिंसा के मामले में मदद मिली। लेकिन ये रिज्यूमे मेकर टूल? अरे ये तो बहुत ज्यादा जेनेरिक है! मेरा रिज्यूमे तो बनाया तो एक ऐसा आया जैसे मैं एक रोबोट हूँ 🤖 अगर आपको अपने रिज्यूमे में थोड़ा इंसानियत चाहिए, तो खुद लिखो! और फिर भी, ये बहुत अच्छी शुरुआत है 🙌

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    Raghav Suri

    जुलाई 1, 2024 AT 10:21

    मैं इस पोस्ट को पढ़कर बहुत खुश हुआ। मेरा दादाजी एक छोटे से गांव में रहते हैं और उन्होंने CSC से अपना पेंशन अपडेट किया। उन्हें इंटरनेट का नहीं पता था, लेकिन वो एक दिन वहां गए और अब खुद से आधार अपडेट कर लेते हैं। ये छोटे-छोटे कदम ही बड़े बदलाव लाते हैं। मैंने खुद भी अपने गांव में एक युवा को ऑनलाइन रिज्यूमे बनाने में मदद की। उसका नाम अभिषेक है, और अब वो एक डिजिटल मार्केटिंग फ्रीलांसर है। ये बदलाव देखकर लगता है कि गांव भी अब शहर की तरह बदल रहा है। बस थोड़ा समय और थोड़ा सा सहयोग चाहिए।

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    Priyanka R

    जुलाई 2, 2024 AT 16:32

    ये सब बहुत अच्छा लगता है... लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये CSC केंद्र असल में डेटा चोरी के लिए हैं? 😏 सरकार और कुछ कंपनियां ग्रामीण लोगों के डिजिटल ट्रैक्स बना रही हैं। जब तक आपका आधार, फोन नंबर, बैंक डिटेल्स और बायोमेट्रिक्स एक डेटाबेस में जमा नहीं हो जाता, तब तक ये सब एक बड़ा गुप्त नेटवर्क है। और हाँ, ये रिज्यूमे टूल? वो तो आपके लिए बनाया गया है ताकि आप नौकरी के लिए लगे लेकिन वास्तविकता में आपकी प्रोफाइल को बेच दिया जाएगा। बच्चों को ये नहीं बताना चाहिए।

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    Rakesh Varpe

    जुलाई 2, 2024 AT 22:26

    कृषि विभाग का योगदान असली बदलाव ला रहा है।

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    Girish Sarda

    जुलाई 4, 2024 AT 15:38

    मैंने भी अपने गांव के CSC में ऑनलाइन रिज्यूमे बनवाया था और फिर एक फ्रीलांसिंग प्लेटफॉर्म पर अप्लाई किया। अभी तक जवाब नहीं आया लेकिन अभी तो बस शुरुआत है। मुझे लगता है अगर ये टूल थोड़ा और अपडेट हो जाए और लोगों को उसके बाद के स्टेप्स की गाइडेंस मिल जाए तो बहुत ज्यादा फायदा होगा। क्या कोई यहां ऐसे लोग हैं जिन्होंने इससे नौकरी पाई है?

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    Garv Saxena

    जुलाई 5, 2024 AT 17:06

    देखो, ये सब तो बहुत अच्छा लगता है... लेकिन क्या हम इसे सच में 'विकास' कह सकते हैं? या ये तो बस एक नया रूप है उसी पुराने अधिकार के जिसने हमें सदियों से गुलाम बनाया है? हम डिजिटल टूल्स बना रहे हैं ताकि ग्रामीण आत्मनिर्भर लगें... लेकिन असल में वो बस एक नया नोड बन रहे हैं एक विशाल ब्यूरोक्रेटिक नेटवर्क के। क्या हम इस तरह के डिजिटल उपकरणों को वास्तविक शक्ति दे रहे हैं? या बस उन्हें एक नए तरीके से नियंत्रित कर रहे हैं? एक किसान के पास रिज्यूमे होना अच्छा है... लेकिन अगर उसकी जमीन उसके नाम पर नहीं है, तो वो रिज्यूमे क्या करेगा? ये सब एक नए रूप में उसी असमानता का चेहरा है।

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